
सरस्वती विद्या मंदिर माधव ज्ञान केंद्र, एक सहशिक्षा संस्थान, अपनी स्थापना के समय से ही अकादमिक उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में एक प्रतिष्ठित स्थान रखता आया है। सर्वविदित तौर पर, उत्कृष्ट संस्थान प्रबंधन समिति, शिक्षकों और कर्मचारियों के अथक सामूहिक प्रयासों से बनते हैं, जो बुनियादी अनुशासन और नागरिक व्यवहार के मानकों को बढ़ावा देते हैं, और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति अटूट लगन और निरंतर लगन के साथ व्यवस्थित रूप से कार्य करते हैं। वर्तमान में, जब मानवीय मूल्यों का व्यापक रूप से क्षरण हो रहा है, हम मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करके पूर्व मानकों को पुनर्स्थापित करने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। अपने विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना और उन्हें सुसंस्कृत नागरिक बनाना हमारी मूलभूत प्राथमिकताएँ हैं। हमारे विद्यालय में अनुशासन, शिष्टाचार, विवेक और नैतिक मूल्यों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इन सभी विशेषताओं और शिक्षण संसाधनों में नियमित वृद्धि, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सहित बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और शिक्षण मानकों में गुणात्मक सुधार के कारण विद्यालय की प्रतिष्ठा और ख्याति निरंतर बढ़ती जा रही है। अंत में, मैं सरस्वती विद्या मंदिर माधव ज्ञान केंद्र की शैक्षणिक उत्कृष्टता की खोज में इस लंबी यात्रा में अटूट सहयोग देने के लिए अपने संकाय, कर्मचारियों और अभिभावकों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहता हूँ। और भविष्य में भी इसी प्रकार के निरंतर स्नेह और सहयोग की आशा करता हूँ।
The Saraswati Vidya Mandir Madhav Gyan Kendra, a Co-Educational institute, has had an enviable reputation as a centre of academic excellence since its establishment. Invariably, excellent institutions are built round untiring collective efforts of the management committee, faculty and the staff to promote basic disciplinaryand civil standards of behaviour, sustained and systematic work carried out with diligence and ceaseless passion for academic excellence. Presently, when human values' erosion has begun to the great extent, we are trying our level best to restore the previous norms by providing value-based education Ensuring all round development of our disciples and making them trained in good citizenship, are our basic priorities. In our school special attention is paid to discipline, etiquettes, sanity and sancitity in thoughts and deeds. Due to all these characteristics and regularly enhancing learning resources, consoldiating basic infrastructure, including the library, laboratories and information cum communication technologies and qualitatively improving its teaching standards, the prestige and reputation of the school is rising up and up successively. Finally, let me record my gratitude towards my faculty, the staff and the guardians for extending their unhesitant co-operation in this long drawn out journey of.. the Sarasvati Vidya Mandri Madhav Gyan Kendra in the pursuit of academic excellence. And I expect the same sustainable affection and co-operation in future.
यह सच है कि अतीत से लेकर वर्तमान तक, मानव जीवन को सुन्दर, सुगम और चुनौतीपूर्ण बनाने में नारियों का योगदान अद्वितीय रहा है। पितृसत्तात्मक समाज ने इस योगदान का सही मूल्यांकन करने में असफलता दिखाई है। संवेदना, प्राकृतिक प्रेम, सौन्दर्यानुभूति जैसे कई गुणों का समन्वय नारी के व्यक्तित्व और कार्यों में देखा जा सकता है। यदि इनका सही आकलन किया जाए, तो निस्संदेह कहा जा सकता है कि "नारी" सृष्टि की सर्वोत्तम रचना है।
आज का युग स्त्री जागरण का युग है। भारत के सर्वोच्च पद, राष्ट्रपति का पद भी एक स्त्री ने सुशोभित किया है। भारतीय महिलाओं ने अंतरिक्ष उड़ान, अंटार्कटिका और ज्वालामुखी की खोज, राफ्टिंग, सेना, और मैनेजमेंट जैसे जटिल और साहसिक क्षेत्रों में भी अपनी जगह बनाई है। कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महिलाओं ने अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। भारत में अनगिनत महिलाएं हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा से पहचान बनाई है। अरुंधति राय, किरण बेदी, चंदा कोचर, मैरीकॉम, और सुनीता नारायण जैसी महिलाएं अपने क्षेत्र में मिसाल बन चुकी हैं। आशा है कि विद्यालय की छात्राएं भी अपनी प्रतिभा को निखारकर अपना एक मजबूत अस्तित्व स्थापित करेंगी और समाज में एक नई पहचान बनाएंगी।
नारी शक्ति का योगदान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने समाज के निर्माण और विकास में भी अहम भूमिका निभाई है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू, और कस्तूरबा गांधी जैसी नारियों का साहस और नेतृत्व आज भी प्रेरणादायक है। उन्होंने न केवल समाज में अपनी जगह बनाई, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्ग प्रशस्त किया।
आधुनिक समय में भी महिलाओं ने शिक्षा, विज्ञान, खेल, और कला जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त की है। वे केवल परिवार की धुरी नहीं हैं, बल्कि समाज की रीढ़ भी हैं। महिलाओं ने दिखाया है कि जब उन्हें समान अवसर मिलते हैं, तो वे किसी भी चुनौती का सामना कर सकती हैं और हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
हमारे विद्यालय की छात्राएं भी इन महान नारियों के पदचिह्नों पर चलकर अपनी पहचान बना सकती हैं। विद्यालय का वातावरण और शिक्षकों का मार्गदर्शन उन्हें न केवल अकादमिक ज्ञान देने में सक्षम है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी करता है।
हर छात्रा में अपार संभावनाएं छिपी होती हैं, और आवश्यकता है कि वे अपनी प्रतिभा को पहचानें और उसे निखारें। आज की लड़कियां कल की महिलाएं होंगी, जो समाज को एक नई दिशा देने में सक्षम होंगी। उनकी सफलता न केवल उनकी अपनी होगी, बल्कि पूरे समाज की होगी, क्योंकि एक शिक्षित और सशक्त महिला पूरे परिवार और समाज को सशक्त बनाती है।
इसलिए, हम आशा करते हैं कि विद्यालय की छात्राएं शिक्षा के क्षेत्र में, और जीवन के हर क्षेत्र में, अपनी मेहनत और समर्पण से सफलता प्राप्त करेंगी और समाज में एक नई मिसाल कायम करेंगी।
